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राष्ट्रीय एएमएसपी सम्मेलन 'एस्पीकॉन 2026' में एम्स रायपुर की टीम का उत्कृष्ट प्रदर्शन

अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान रायपुर संस्थान

रायपुर, 16 अक्टूबर, 2026 — रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एमआर/AMR) आज दुनिया भर में एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है और यह गंभीर बीमारियों तथा मृत्यु के 10 प्रमुख कारणों में शामिल है। इस चुनौती से निपटने के लिए एम्स बठिंडा (पंजाब) में 8 से 11 अक्टूबर तक राष्ट्रीय सम्मेलन 'एस्पीकॉन 2026' का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन 'सोसाइटी ऑफ एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप प्रैक्टिसेस इन इंडिया' (SASPI) के तत्वावधान में हुआ, जिसमें देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक दवाओं के सही इस्तेमाल और एएमआर को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा की। इस राष्ट्रीय मंच पर एम्स रायपुर की 10 सदस्यीय टीम ने संस्थान का प्रतिनिधित्व किया। इस टीम में फार्माकोलॉजिस्ट,माइक्रोबायोलॉजिस्ट, संक्रामक रोग विशेषज्ञ, सीनियर व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर और इंटर्न शामिल थे। संकाय सदस्य डॉ. नितिन गायकवाड़, डॉ. पुगझेंथन टी. और डॉ. प्रशांत बडोले ने विषय विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया तथा उन्नत स्टीवर्डशिप रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए। वहीं एएमएसपी समिति के सदस्य सचिव डॉ. अभिजीत कुमार प्रसाद ने स्थान में चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी साझा की। सम्मेलन में एम्स रायपुर के डॉक्टरों ने अपने शोध कार्यों के लिए कई पुरस्कार प्राप्त किए। मौखिक शोध पत्र प्रस्तुति श्रेणी में डॉ. कृष्णप्रिया एन. ने प्रथम तथा डॉ. सजीथा वी. ने द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। पोस्टर प्रस्तुति श्रेणी में डॉ. अभिजीत कुमार प्रसाद ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। इसके अलावा डॉ. गार्गी मिश्रा, डॉ. निहिलन एस., डॉ. एरीस्वामी तालुक और डॉ. मेधांश बिरादार ने भी अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। उत्कृष्ट चिकित्सीय ज्ञान का परिचय देते हुए, डॉ. कृष्णप्रिया, डॉ. निहिलन और डॉ. एरीस्वामी कीटीम ने देशभर के 39 संस्थानों के बीच आयोजित राष्ट्रीय एएमएसपी क्विज़ में चौथा स्थान हासिल किया। सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों और वरिष्ठ डॉक्टरों ने एम्स रायपुर में लागू एएमएसपी मॉडल की सराहना की। इस सफलता पर एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक ले. जनरल (डॉ.) अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) और डीन (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) एली महापात्रा ने पूरी टीम को बधाई दी। निदेशक ने डॉक्टरों को सम्मेलन की सीख को अस्पताल के दैनिक कामकाज में लागू करने के लिए प्रेरित किया ताकि एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को और बेहतर बनाया जा सके।